डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद उठापटक का दौर जारी है। महत्त्वपूर्ण बीएमसी मेयर पद को लेकर पार्टियों के बीच चर्चाओं का सिलसिला तेज है। एकनाथ शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को ताज होटल में बैठाकर रखा है, वहीं उद्धव ठाकरे गुट लगातार भाजपा और शिवसेना के बीच तनाव पैदा करने के प्रयास में जुटा है।
इस चुनाव में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन कर अपने दोनों सहयोगी—उद्धव गुट और शरद पवार गुट—को पीछे छोड़ दिया। शरद पवार को अपने गढ़ पुणे में हार झेलनी पड़ी, जबकि उद्धव ठाकरे को तीन दशकों बाद मुंबई में अपने राजशाही के नुकसान का सामना करना पड़ा।
29 नगर निगमों में चुनाव परिणाम इस प्रकार रहे:
- भाजपा: 1,425 सीटें, सबसे बड़ी पार्टी
- शिंदे गुट शिवसेना: 399 सीटें, दूसरी सबसे बड़ी पार्टी
- कांग्रेस: 324 सीटें, तीसरा स्थान
- अजित पवार गुट (महायुति): 167 सीटें, चौथा स्थान
- उद्धव गुट शिवसेना: 155 सीटें
- एनसीपी शरद पवार गुट: केवल 36 सीटें
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस ने इस चुनाव में साबित कर दिया कि वह अकेले या सीमित गठबंधन में भी टिक सकती है। इसके नतीजे यह दिखाते हैं कि उद्धव गुट ने मुंबई में अपनी पकड़ गंवाई, शरद पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ जैसे गढ़ खो दिए, जबकि कांग्रेस ने कोल्हापुर, चंद्रपुर और भिंवडी में मजबूत प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिवसेना (यूबीटी) और शिंदे गुट के बीच वोटों का बंटवारा कई वार्डों में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए फायदेमंद रहा। इसके विपरीत एनसीपी को पुणे और शहरी क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा।
निकाय चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र के विपक्ष में कांग्रेस को एकमात्र ऐसी पार्टी के रूप में खड़ा किया है, जिसकी पूरे राज्य में उपस्थिति है। अब कांग्रेस महाविकास अघाड़ी में सीटों के बंटवारे और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने राष्ट्रीय एजेंडे के साथ कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।













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