डेस्क: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत कई अहम क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने एक साक्षात्कार में यह जानकारी दी।
मार्क कार्नी अमेरिका पर निर्भरता कम करते हुए कनाडा के अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों को विविध बनाने की दिशा में सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में दावोस में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि पुरानी ‘नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था’ अब काम नहीं कर रही है और मध्यम शक्तियों को मिलकर एक अधिक न्यायसंगत और स्थिर विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए आगे आना चाहिए। उनके इस बयान को व्यापक सराहना मिली और उन्हें दुर्लभ स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला।
दावोस भाषण के बाद कार्नी की नीति को तब और बल मिला जब कनाडा ने चीन के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों और कैनोला पर टैरिफ कम करने का समझौता किया, जिससे करीब 7 अरब कनाडाई डॉलर के नए निर्यात अवसर खुलने की उम्मीद है। कार्नी का लक्ष्य अगले दस वर्षों में अमेरिका के बाहर होने वाले निर्यात को दोगुना करना है।
भारत के साथ संबंधों को पुनः मजबूत करना भी कार्नी की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा 2023 में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता के आरोपों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज किया था। हालांकि, पिछले वर्ष कार्नी के आमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया था और कनाडा के कई मंत्री भारत का दौरा कर चुके हैं।
भारत के उच्चायुक्त पटनायक ने कहा, “हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कार्नी का दौरा मार्च के पहले सप्ताह में हो सकता है।” हालांकि, कार्नी के कार्यालय ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार किया है। वहीं ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा है कि कार्नी मार्च में ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर संसद को संबोधित करेंगे।
इस बीच कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन इस सप्ताह भारत में हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे की तारीख अभी तय नहीं है और यह प्रगति पर निर्भर करेगी। पटनायक के अनुसार, भारत-कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर औपचारिक वार्ता मार्च में शुरू हो सकती है। नवंबर में दोनों देशों ने लंबे समय से रुकी व्यापार वार्ताओं को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी।
प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान मार्क कार्नी परमाणु ऊर्जा, तेल-गैस, पर्यावरण, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इनमें 10 वर्षों के लिए 2.8 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता भी शामिल हो सकता है।
ऊर्जा मंत्री हॉजसन ने इस सौदे की पुष्टि नहीं की, लेकिन कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों का पालन किए जाने पर कनाडा भारत को यूरेनियम आपूर्ति को लेकर सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि भारत नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े विस्तार की योजना बना रहा है।
पटनायक ने बताया कि हॉजसन की यात्रा और कार्नी के संभावित दौरे के बीच ऊर्जा और खनन से जुड़े कई अहम समझौतों की घोषणा हो सकती है, जिनमें क्रिटिकल मिनरल्स, कच्चा तेल और एलएनजी से संबंधित करार प्रमुख होंगे।
दोनों देश पिछले दो वर्षों से रुकी वार्ताओं को तेजी से आगे बढ़ाने के मूड में हैं, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित देश वैकल्पिक आर्थिक रास्ते तलाश रहे हैं। पटनायक ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ी है और ऐसे में आपसी समझौते देशों को अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से सुरक्षित कर सकते हैं।
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को चेतावनी दी है कि यदि उसने चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया तो 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है। इस पर कार्नी ने कहा कि कनाडा, अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करता है।
पटनायक ने यह भी कहा कि खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े मामले में कनाडा में चार आरोपियों पर मुकदमा चल रहा है। यदि किसी भी स्तर पर भारतीय संलिप्तता के प्रमाण सामने आते हैं, तो भारत उचित कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अगले महीने ओटावा का दौरा करेंगे, जहां दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा होगी।













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