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वंदे मातरम् पर नए सरकारी नियम, राष्ट्रगान के साथ होगा अनिवार्य गायन

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
February 11, 2026
in देश, मुख्य समाचार
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वंदे मातरम् पर नए सरकारी नियम, राष्ट्रगान के साथ होगा अनिवार्य गायन

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार राष्ट्रगान के तुरंत बाद छह छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा और इस दौरान सभी उपस्थित लोगों के लिए खड़े होना अनिवार्य होगा। गीत की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों गाए जाने हों, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया जाएगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

‘वंदे मातरम्’ की रचना प्रारंभ में स्वतंत्र रूप से की गई थी, जिसे बाद में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास आनंदमठ (1882) में शामिल किया। 1896 में कलकत्ता में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया। 7 अगस्त 1905 को इसे पहली बार राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल किया गया। वर्ष 1950 में संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम्’ को भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया।

किन कार्यक्रमों में अनिवार्य

सरकारी निर्देशों के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ को कई आधिकारिक अवसरों पर गाया जाना अनिवार्य होगा। इनमें ध्वजारोहण समारोह, राष्ट्रपति के आगमन से पूर्व और प्रस्थान के बाद आयोजित कार्यक्रम, राज्यपालों के स्वागत एवं विदाई समारोह, तथा पद्म पुरस्कार जैसे राष्ट्रीय सम्मान समारोह शामिल हैं। सरकार ने ऐसे कार्यक्रमों की एक विस्तृत सूची भी जारी की है।

ब्रिटिश काल में विरोध

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के बढ़ते प्रभाव से चिंतित ब्रिटिश सरकार ने इसके प्रसार को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए थे। पूर्वी बंगाल प्रांत की सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में इसे गाने या बोलने पर रोक लगाने वाले आदेश जारी किए थे। संस्थानों की मान्यता रद्द करने और आंदोलन में शामिल छात्रों को सरकारी नौकरियों से वंचित करने की धमकी दी गई थी।

नवंबर 1905 में बंगाल के रंगपुर स्थित एक विद्यालय के 200 छात्रों पर ‘वंदे मातरम्’ गाने के आरोप में प्रति छात्र 5 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, बंटवारे का विरोध कर रहे नेताओं को स्पेशल कांस्टेबल के रूप में नियुक्त कर गीत गाने से रोकने के निर्देश दिए गए। 1906 में महाराष्ट्र के धुलिया में आयोजित एक बड़ी सभा में ‘वंदे मातरम्’ के नारे गूंजे। 1908 में बेलगाम (कर्नाटक) में लोकमान्य तिलक को मांडले (बर्मा) भेजे जाने के दिन, मौखिक प्रतिबंध के बावजूद गीत गाने पर पुलिस ने कई युवकों की पिटाई की और अनेक लोगों को गिरफ्तार किया।

सरकार के ताजा निर्देशों के साथ ‘वंदे मातरम्’ एक बार फिर औपचारिक आयोजनों में प्रमुख स्थान पर दिखाई देगा।

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