डेस्क : बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर अब सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के नेता भी सवाल उठा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग का खुलकर समर्थन किया है।
चिराग पासवान ने रविवार को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार में शराब पर प्रतिबंध के दौरान कहां-कहां लीकेज हो रहा है, इसे समझने के लिए समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया, “किसी भी योजना की समीक्षा जरूरी होती है। यह देखने के लिए कि जिस उद्देश्य के साथ शराब पर प्रतिबंध लगाया गया था, क्या वह पूरा हो रहा है। यदि पूरा नहीं हो रहा, तो उसमें कमी-कमज़ोरी क्या है? क्या सीमावर्ती क्षेत्रों से शराब आ रही है? क्या ब्लैक मार्केट में शराब बिक रही है? बार-बार होम डिलिवरी की बात उठती रही है।”
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इन तमाम पहलुओं की समीक्षा से ही यह स्पष्ट होगा कि शराबबंदी का वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं। यदि लाभ नहीं मिल रहा है, तो लीकेज या लूपहोल्स को बंद किया जाएगा।
एनडीए में भी उठे विरोध के सुर
हाल ही में खत्म हुए बिहार विधानसभा के बजट सत्र में एनडीए के कुछ विधायकों ने भी शराबबंदी कानून को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। भाजपा के विधायक विनय बिहारी ने कानून की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि हर जगह शराब उपलब्ध हो रही है। वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक माधव आनंद ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया और कानून की समीक्षा करने की आवश्यकता जताई।
नीतीश सरकार का रुख
हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने फिलहाल शराबबंदी कानून की समीक्षा से इनकार कर रखा है। संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने हाल ही में विधानसभा में माधव आनंद के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है और यह आगे भी जारी रहेगा। वर्तमान में सरकार के पास इस कानून की समीक्षा का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इस स्थिति के बीच बिहार में शराबबंदी कानून और उसकी प्रभावशीलता पर सत्तापक्ष के भीतर से उठ रहे सवाल राजनीतिक चर्चा का नया केंद्र बन गए हैं।













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