डेस्क : मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुँच गया है, जहाँ इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। शुक्रवार और शनिवार की रात को इजरायली और अमेरिकी मिसाइल हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई उच्चस्तरीय नेता मारे गए हैं। इन हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ईरान ने अमेरिकी और इजरायली हमलों का तुरंत जवाब देते हुए मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। दुबई, कतर, बहरीन सहित कई अन्य क्षेत्रों में ईरानी मिसाइल हमलों की खबरें मिली हैं।
इस बीच, चीन ने अपने बयान में स्थिति को गंभीरता से लिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को सभी पक्षों से तुरंत तनाव कम करने और बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया। चीन ने स्पष्ट किया कि एक सॉवरेन देश के नेता की खुलेआम हत्या और सरकार बदलने के लिए उकसाना स्वीकार्य नहीं है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बातचीत में कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमले न केवल ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और यूनाइटेड नेशंस चार्टर के सिद्धांतों के भी खिलाफ हैं। उन्होंने मिलिट्री कार्रवाई तुरंत रोकने और एकतरफा हमलों का विरोध करने पर जोर दिया।
रविवार को चीन के दूतावास ने इजरायल में अपने नागरिकों को सुरक्षित इलाकों में जाने या मिस्र के ताबा बॉर्डर क्रॉसिंग के माध्यम से देश छोड़ने की सलाह दी। ईरान में भी चीनी नागरिकों से जल्द सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान करने को कहा गया है, जिसमें अजरबैजान, आर्मेनिया, तुर्की और इराक के चार जमीनी मार्ग सुझाए गए हैं।
चीनी मीडिया शिन्हुआ ने इस पूरे घटनाक्रम को एक सॉवरेन देश पर खुला हमला और पावर पॉलिटिक्स का उदाहरण बताते हुए निंदा की है। चीन ने कहा कि अमेरिका की यह मिलिट्री कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों के विपरीत है और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है।













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