डेस्क : गुजरात सरकार ने बुधवार को ‘गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC), 2026’ विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया है। इसके साथ ही राज्य समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ गया है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन (लिव-इन) संबंधों से जुड़े कानून धर्म, जाति या पंथ से परे सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे।
विधेयक के मसौदे में विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ‘हलाला’ प्रथा पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। मसौदे के अनुसार, तलाक के बाद कोई भी दंपति बिना किसी शर्त के दोबारा विवाह कर सकता है, जिसमें पूर्व पति-पत्नी के बीच पुनर्विवाह भी शामिल है। इसके लिए किसी तीसरे व्यक्ति से विवाह जैसी शर्तें आवश्यक नहीं होंगी। यदि इस प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है, तो तीन साल तक की सजा या एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
क्या है हलाला प्रथा?
मुस्लिम समाज में प्रचलित निकाह हलाला के तहत, यदि कोई पुरुष अपनी पत्नी को तलाक देता है, तो महिला को दोबारा उसी पुरुष से विवाह करने से पहले किसी अन्य पुरुष से निकाह करना होता है। इस प्रक्रिया के तहत विवाह और शारीरिक संबंध के बाद, दूसरे पति से तलाक लेकर ही वह अपने पहले पति से पुनर्विवाह कर सकती है।
विधेयक के अन्य प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित कानून में वैध विवाह के लिए स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं। इसमें बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, पुरुषों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
विधानसभा में आगे की प्रक्रिया
राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ने हाल ही में अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी थी। इसके बाद यह विधेयक विधानसभा में पेश किया गया। सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघानी ने बताया कि इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होगी और सभी सदस्यों को अपने विचार रखने का अवसर दिया जाएगा। विधानसभा सचिव सी.बी. पांड्या के अनुसार, विधेयक पर 24 मार्च को चर्चा शुरू हो सकती है और 25 मार्च को इसे पारित किए जाने की संभावना है।
किस पर होगा लागू और किसे मिलेगी छूट?
‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ पूरे राज्य में लागू होगी और राज्य के बाहर रहने वाले गुजरात के नागरिक भी इसके दायरे में आएंगे। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और उन समूहों को इससे छूट दी गई है, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित हैं।
सरकार का कहना है कि यह विधेयक धर्म, जाति, पंथ या लिंग के आधार पर भेदभाव खत्म करते हुए सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करेगा। इसका उद्देश्य धर्मनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देना है, जिससे समाज में एकता और अखंडता मजबूत हो सके।













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