डेस्क : बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव ने महागठबंधन (कांग्रेस‑RJD‑सहयोगी दलों) के लिए राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) ने सभी पाँच सीटों पर जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन का कोई भी प्रत्याशी विजयी नहीं हो पाया।
राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को कुल 41 विधायकों का समर्थन चाहिए था, लेकिन चुनाव के दिन चार महागठबंधन विधायक अनुपस्थित रहे। इससे विपक्ष का गणित बिगड़ गया और एनडीए उम्मीदवारों ने आसानी से जीत दर्ज की। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बागी रवैया विपक्ष के लिए निर्णायक साबित हुआ।
कांग्रेस‑RJD में असमंजस
महागठबंधन पार्टियों ने बागी विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई में देरी दिखाई है।
- कांग्रेस ने तीन बागी विधायकों — सुरेंद्र मेहता (वाल्मीकि नगर), मनोज विश्वास (फारबिसगंज) और मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी) — को “कारण बताओ” नोटिस जारी किया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
- RJD ने अपने विधायक फैसल रहमान के खिलाफ अभी तक कोई नोटिस जारी नहीं किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपनी अनुपस्थिति का कारण मां की बीमारी बताया।
राजनीतिक प्रभाव और एनडीए की प्रतिक्रिया
बागी विधायकों के मुद्दे ने महागठबंधन में आंतरिक मतभेद और अनुशासनहीनता को उजागर किया। एनडीए ने इस हार को विपक्ष की कमजोर संगठनात्मक स्थिति और एकजुटता की कमी के कारण बताया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह चुनाव महागठबंधन के भीतर रणनीतिक पुनर्गठन की आवश्यकता को स्पष्ट करता है, और अगले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के लिए चेतावनी के रूप में कार्य करेगा।













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