जयपुर: महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल में मंगलवार को महावीर जयंती का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण” ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए कहा कि हिंसा कायरता है और केवल अहिंसा के पथ पर चलने वाला ही सच्चा वीर कहलाता है।
मुनि श्री जी ने अपने संदेश में कहा कि “विश्व में शांति अणुअस्त्रों से नहीं, अहिंसा के शस्त्रों से होगी। क्षमा, मैत्री, करुणा, प्रेम और भाईचारा ही सच्चे अहिंसक शस्त्र हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया में अहिंसा सर्वोच्च शक्ति है, जो हिंसा और क्रूरता को हराकर मानव समाज में भयमुक्त वातावरण का निर्माण करती है।
मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि “अहिंसा सर्वधर्म, परम धर्म और सर्वकल्याणकारी है। जीव और जगत का अस्तित्व अहिंसा से ही सुरक्षित है। जैसे धरती माता जीवन देती है, वैसे ही अहिंसा जीवनदाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत मूलतः अहिंसा प्रधान देश है और दुनिया में समृद्धि और खुशहाली अहिंसा से ही संभव है।
कार्यक्रम में तेरापंथ महिला मंडल (सी-स्कीम) की बहिनों ने सामूहिक गीत प्रस्तुत किया, जबकि श्री प्रकाश जी बांठिया एवं श्रीमती सरोज जी घीया ने संगीत के माध्यम से भावनाओं का संचार किया। भगवान महावीर की स्तुति में चौबीसी का संगान हुआ और “महावीराय नमः” मंत्र का जप एवं ध्यान कराया गया।
इस अवसर पर कई बहिनों और भाइयों ने उपवास व्रत का प्रत्याख्यान किया। समाजसेवी श्रीमान भंवर जी गोठी ने श्रद्धालुओं का स्वामीवात्सल्य के साथ सत्कार किया। धर्मसभा में विशिष्ट अतिथि श्री शुभकरण जी दुगड़ (मंत्री, भिक्षु साधना केन्द्र) और एडवोकेट श्री निर्मल कुमार जी मालू सहित सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
समारोह का संदेश स्पष्ट था – अहिंसा ही जीवन, मुक्ति और विश्व शांति का मार्ग है।












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