डेस्क : छोटे कारोबारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में एक बार फिर कर्ज राहत को लेकर बहस तेज हो गई है। आर्थिक दबाव, बढ़ती ईएमआई और कमजोर नकदी प्रवाह के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या कोविड-19 काल की तरह एक बार फिर लोन भुगतान में राहत या माफी जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
छोटे कारोबारियों का कहना है कि महामारी के बाद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाई हैं। बाजार में मांग की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और बैंकों की सख्त वसूली नीति के कारण कई उद्यमी किस्तें समय पर चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर राहत पैकेज की मांग जोर पकड़ रही है।
कारोबारी संगठनों की मांग
विभिन्न कारोबारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए विशेष राहत योजना लाई जाए। इसमें कुछ महीनों की ईएमआई स्थगन सुविधा, ब्याज दरों में राहत और संकटग्रस्त इकाइयों के लिए पुनर्गठन जैसे विकल्प शामिल करने की बात कही जा रही है।
सरकार के स्तर पर संकेत
सूत्रों के अनुसार, सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सीमित तथा लक्षित राहत उपायों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि अभी तक किसी व्यापक लोन माफी या बड़े पैमाने पर मोरेटोरियम जैसी योजना की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
नीति-निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार किसी भी राहत को कोविड काल की तरह व्यापक रूप नहीं दिया जाएगा, बल्कि केवल उन क्षेत्रों और इकाइयों तक सीमित रखा जाएगा जो वास्तविक संकट में हैं।
एमएसएमई क्षेत्र पर दबाव
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन यह सबसे अधिक वित्तीय दबाव झेलने वाला क्षेत्र भी है। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, देरी से भुगतान और बाजार की सुस्ती ने इस क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
आगे की राह
फिलहाल इस मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन उद्योग जगत की लगातार उठती मांगों के बीच सरकार से आने वाले समय में किसी राहत पैकेज की घोषणा की उम्मीद की जा रही है।
निष्कर्ष
कोविड जैसी लोन माफी की उम्मीदें फिलहाल अनिश्चित हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राहत उपायों पर चर्चा जरूर तेज हो गई है। अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।













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