डेस्क : उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए नौसेना के युद्धपोत से क्रूज़ और एंटी-शिप मिसाइलों का परीक्षण किया है। यह परीक्षण देश के नए डेस्ट्रॉयर युद्धपोत से किया गया, जिसे आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस बताया जा रहा है।
राज्य मीडिया के अनुसार, इस परीक्षण का उद्देश्य युद्धपोत की मारक क्षमता और विभिन्न हथियार प्रणालियों के समन्वय का मूल्यांकन करना था। परीक्षण के दौरान दागी गई मिसाइलों ने निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता के साथ भेदा, जिससे उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य तकनीक का संकेत मिलता है।
इस पूरे परीक्षण की निगरानी स्वयं उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने की। उन्होंने सेना को निर्देश देते हुए कहा कि देश की रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत किया जाए और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली सैन्य शक्ति का विकास किया जाए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह युद्धपोत ऐसे उन्नत मिसाइल सिस्टम से लैस है, जो संभावित रूप से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हो सकते हैं। इसे उत्तर कोरिया की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपनी नौसेना को भी परमाणु क्षमता से लैस करना चाहता है।
इसके साथ ही संकेत मिले हैं कि उत्तर कोरिया इसी श्रेणी के और युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है, जिससे भविष्य में उसका नौसैनिक बेड़ा और अधिक शक्तिशाली हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के इस कदम से पूर्वी एशिया क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं। लगातार हो रहे मिसाइल परीक्षणों के कारण पहले से ही तनावपूर्ण माहौल और अधिक गंभीर हो सकता है।













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