नई दिल्ली : राजधानी की एक अदालत ने मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या करने वाले दोषी को “प्राकृतिक जीवन की अंतिम सांस” तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराधी को किसी भी प्रकार की माफी या समय से पहले रिहाई का लाभ नहीं मिलेगा।
‘इंसानियत पर कलंक है यह कृत्य’
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (POCSO कोर्ट) ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि यह अपराध न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवता पर एक गहरा घाव है। कोर्ट ने कहा कि एक अबोध बच्ची के साथ ऐसी दरिंदगी करने वाला व्यक्ति समाज में रहने के लायक नहीं है।
“दोषी का कृत्य इतना क्रूर और भयावह है कि वह किसी भी प्रकार की सहानुभूति का पात्र नहीं है। समाज में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए ऐसे अपराधियों को कठोरतम दंड मिलना अनिवार्य है।” — पीठासीन न्यायाधीश
क्या था पूरा मामला?
यह मामला दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का है, जहाँ दोषी ने एक नाबालिग बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर अपनी पहचान छिपाने के लिए उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी।
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फॉरेंसिक साक्ष्य: पुलिस ने अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए, जिसमें DNA रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्य सबसे अहम रहे।
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गवाहों की भूमिका: अभियोजन पक्ष ने कड़ी मेहनत से गवाहों को अदालत में पेश किया, जिनके बयानों ने दोषी के खिलाफ केस को अटूट बना दिया।
मुआवजे का निर्देश
सजा सुनाने के साथ ही अदालत ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (DSLSA) को निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवार को कानून के तहत अधिकतम मुआवजा दिया जाए। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
| श्रेणी | विवरण |
| अपराध | दुष्कर्म, हत्या और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दोषी |
| सजा | आजीवन कारावास (अंतिम सांस तक जेल) |
| जुर्माना | दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया गया |
| न्यायालय की टिप्पणी | इसे ‘अत्यंत गंभीर और क्रूर’ श्रेणी का अपराध माना गया |













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