कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में मतदान से ठीक पहले राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर गंभीर और सीधे आरोप लगाते हुए कहा है कि आयोग की ओर से उसके नेताओं को “निशाना बनाने” के निर्देश दिए जा रहे हैं।
टीएमसी का दावा है कि आयोग के अधीनस्थ अधिकारियों को व्हाट्सऐप समूहों के जरिए ऐसे निर्देश भेजे गए हैं, जिनमें पुलिस, पर्यवेक्षकों और केंद्रीय बलों को पार्टी नेताओं और उनके परिवारों के वाहनों की विशेष रूप से तलाशी लेने को कहा गया है। पार्टी के अनुसार, इन निर्देशों में राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार को भी निशाने पर रखने की बात शामिल है।
टीएमसी ने इसे केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि “राजनीतिक हस्तक्षेप” करार देते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए पार्टी के चुनाव प्रचार और जनसंपर्क अभियानों को बाधित करने की कोशिश की जा रही है।
इस विवाद को और हवा तब मिली जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया कि उनकी भवानीपुर सीट से उम्मीदवारी रद्द कराने के लिए “फर्जी हलफनामे” दाखिल किए गए थे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि एक मुख्यमंत्री के साथ ऐसा प्रयास हो सकता है, तो आम मतदाता कितने सुरक्षित हैं।
ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी केंद्र और चुनाव आयोग पर हमला बोला। उन्होंने इसे “लोकतंत्र के खिलाफ साजिश” बताते हुए आरोप लगाया कि लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिससे चुनावी संतुलन प्रभावित हो सकता है।
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है, जबकि 4 मई को नतीजे घोषित होंगे। 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 सीटों तक पहुंची थी। ऐसे में इस बार का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व की निर्णायक लड़ाई बनता जा रहा है।













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