लखनऊ : कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता मामले की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने स्वयं को इस प्रकरण से अलग कर लिया है।
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी पर कथित रूप से ब्रिटिश नागरिकता रखने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे तथा जांच के लिए राज्य सरकार या केंद्रीय एजेंसी की सहायता लेने की अनुमति भी प्रदान की थी।
अब इसी मामले में न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया है। हालांकि, उनके इस निर्णय के पीछे का विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी न्यायाधीश द्वारा किसी मामले से स्वयं को अलग करना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे ‘रिक्यूज़ल’ कहा जाता है। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब न्यायिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने या अन्य प्रशासनिक कारणों से आवश्यकता महसूस होती है।
इस निर्णय के बाद अब यह मामला किसी अन्य पीठ के समक्ष स्थानांतरित किया जाएगा। आगामी दिनों में यह तय होगा कि इस प्रकरण की आगे की सुनवाई कौन-सी अदालत करेगी।
फिलहाल इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।













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