नई दिल्ली : दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग को सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत प्रदान किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ली के साथ उनकी पत्नी किम हे क्यंग भी भारत दौरे पर हैं।
औपचारिक स्वागत के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे पहले रविवार को दिल्ली पहुंचे ली जे म्युंग का यह तीन दिवसीय भारत दौरा है। खास बात यह है कि आठ वर्षों से अधिक समय के बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा है।
दिल्ली में पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ली ने भारतीय मूल के कोरियाई समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आगामी भारत–कोरिया शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। उनके अनुसार यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाने की क्षमता रखती है।
राष्ट्रपति ली ने भारत की वैश्विक भूमिका पर भी विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत अब केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं रहा, बल्कि वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को दिशा देने वाला प्रमुख देश बन चुका है। उनके अनुसार यह बदलाव भारत की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक शक्ति को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय ने भी इस दौरे को भारत–दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।
अपने आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति ली ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। इसके बाद सबसे अहम चरण के रूप में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय शिखर वार्ता में शामिल होंगे।
इन वार्ताओं में सेमीकंडक्टर, रक्षा निर्माण और हरित ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की संभावना है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देश एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी करेंगे, जिसमें भविष्य की साझेदारी की दिशा स्पष्ट की जाएगी। आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति ली भारत मंडपम में आयोजित एक व्यापार मंच में भी भाग लेंगे। इसके अलावा वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 2015 में संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था। पिछले एक दशक में यह साझेदारी बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में लगातार विस्तारित हुई है। वर्तमान यात्रा को इसी सहयोग को और व्यापक और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













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