चेन्नई : तमिलनाडु के तेनकासी जिले में यूकेजी की एक छात्रा की स्कूल परिसर में हुई मौत के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए शिक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि एक समय शिक्षा को पवित्र सेवा माना जाता था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे व्यापार का रूप लेती जा रही है।
मामला मार्च 2026 का है, जब एक निजी स्कूल परिसर में कार की चपेट में आने से पांच वर्षीय छात्रा की मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रा के परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने मामले को सामान्य दुर्घटना बताकर दबाने का प्रयास किया, जबकि पुलिस ने भी निष्पक्ष जांच नहीं की।
मद्रास हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति बी. पुगलेन्धी की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन ने वाहन और घटना से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई, जिससे संदेह की स्थिति बनी।
हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई, आरोपियों के नाम तुरंत शामिल नहीं किए गए और वाहन भी समय रहते जब्त नहीं किया गया।
कोर्ट ने मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी सर्वोच्च होनी चाहिए।
इस फैसले को शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही तय करने और स्कूल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













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