नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र की विदेश नीति पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कूटनीतिक रणनीति पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में असफल रही है।
जयराम रमेश ने कहा कि हाल के वैश्विक घटनाक्रम इस बात के संकेत हैं कि पाकिस्तान, तमाम आरोपों और आर्थिक संकट के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका बनाए हुए है। उन्होंने दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच संभावित संघर्ष विराम वार्ता के दूसरे दौर को लेकर इस्लामाबाद का नाम सामने आना इसी बदलाव का उदाहरण है।
कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि वह लंबे समय से विदेशी सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वैश्विक मंचों पर उसकी भागीदारी बनी हुई है। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर पुरानी भूमिका निभाने का आरोप लगाया।
जयराम रमेश ने कहा कि २००८ के मुंबई आतंकी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत की कूटनीति ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी हद तक अलग-थलग कर दिया था, जबकि वर्तमान सरकार उस स्तर की रणनीतिक सफलता हासिल नहीं कर पाई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की विदेश नीति और वैश्विक नैरेटिव प्रबंधन कमजोर साबित हुआ है, जिसके चलते पाकिस्तान की स्थिति में अपेक्षित गिरावट नहीं आई है।
कांग्रेस सांसद ने पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कथित संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे भारत की कूटनीतिक चुनौतियाँ बढ़ी हैं।
जयराम रमेश ने इस पूरे घटनाक्रम को भारत की विदेश नीति के लिए “गंभीर कूटनीतिक झटका” करार देते हुए कहा कि रणनीति में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नेतृत्व के तहत इस दिशा में बदलाव की संभावना कम दिखाई देती है।
उधर, ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष विराम वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगाहें टिकी हुई हैं। पहले दौर की बातचीत में कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी थी और अब संभावित नए दौर को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













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