नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि 6 अप्रैल 2022 के बाद से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के मद्देनज़र लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि देशभर में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति खुदरा केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, हालांकि कुछ स्थानों पर घबराहट में खरीदारी के मामले सामने आए हैं। लोगों से अनुरोध है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।”
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 6 अप्रैल 2022 के बाद से पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। सरकार ने मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2022 में उत्पाद शुल्क में कटौती की गई थी, 2024 में भी कीमतों में कमी की गई और 27 मार्च 2026 को एक बार फिर पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती की गई। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू कीमतों को स्थिर रखना है।
सुजाता शर्मा ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात प्रभावित हुआ है, लेकिन सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
एलपीजी आपूर्ति को लेकर उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। बुधवार को 52 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए गए। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 44 से 45 लाख बुकिंग दर्ज की जा रही हैं, जबकि 94 प्रतिशत डिलीवरी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड प्रणाली के माध्यम से की जा रही है, जिससे दुरुपयोग पर रोक लगी है।
व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति लगभग 70 प्रतिशत बहाल कर दी गई है और अप्रैल माह में अब तक 1.40 लाख टन से अधिक गैस की बिक्री हो चुकी है। यह आपूर्ति मुख्य रूप से होटल, ढाबा, रेस्तरां तथा स्टील, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रसायन, प्लास्टिक, पैकेजिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में की जा रही है। एक दिन में लगभग 8,403 टन व्यावसायिक एलपीजी की बिक्री दर्ज की गई।
इसके अलावा 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडरों की बिक्री में भी वृद्धि देखी गई है। 3 अप्रैल से अब तक तेल विपणन कंपनियों द्वारा 8,900 से अधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 1.27 लाख छोटे सिलेंडरों की बिक्री हुई है। 1 अप्रैल से अब तक कुल 17 लाख से अधिक 5 किलोग्राम सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। केवल बुधवार को ही लगभग 86,000 सिलेंडरों की बिक्री हुई।
प्राकृतिक गैस क्षेत्र में भी सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के विस्तार पर जोर दे रही है। मार्च से अब तक 5.18 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए गए हैं, जबकि 2.58 लाख से अधिक नए कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 7.76 लाख कनेक्शनों का विस्तार हुआ है।
सरकार ने यह भी बताया कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद घरेलू एलपीजी दरों को स्थिर रखा गया है। भारतीय कच्चा तेल बास्केट, जो वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल था, मार्च में बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गया है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर असर नहीं पड़ने दिया गया है।













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