नई दिल्ली: भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों में एक “ऐतिहासिक क्षण” बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई मजबूती देगा और व्यापार एवं निवेश के अवसरों को व्यापक रूप से बढ़ाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में जयशंकर ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करेगा और निवेश को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने लिखा कि यह समझौता नवाचार, उद्यमिता, किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
यह एफटीए सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और कारोबारी भी इस मौके पर उपस्थित रहे।
सरकारी जानकारी के अनुसार, न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसे भारत की आर्थिक वृद्धि में दीर्घकालिक विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
यह समझौता 16 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की बैठक के बाद औपचारिक रूप से शुरू हुआ था। पांच दौर की वार्ताओं के बाद इसे 22 दिसंबर 2025 को अंतिम रूप दिया गया।
समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड ने कई भारतीय उत्पादों पर लगभग 10 प्रतिशत तक के शुल्क को हटाने पर सहमति दी है। इसमें कपड़ा, चमड़ा उत्पाद, कालीन, सिरेमिक और ऑटो कंपोनेंट्स शामिल हैं। इसके अलावा चाय, कॉफी और मसालों जैसे कृषि उत्पादों को भी बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी।
भारत ने भी अपने करीब 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच दी है, जबकि लगभग 30 प्रतिशत उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। कुछ वस्तुओं पर शुल्क तुरंत समाप्त किया जाएगा, जबकि कुछ पर चरणबद्ध तरीके से कटौती होगी।
संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी उत्पाद, चीनी, तेल, रत्न-आभूषण और कुछ धातुओं को इस समझौते से बाहर रखा गया है। हालांकि सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे उत्पादों के लिए सीमित कोटा के तहत आयात की अनुमति दी गई है।
सेवा क्षेत्र में भी व्यापक सहयोग की संभावना बनी है। न्यूज़ीलैंड ने 100 से अधिक सेवा क्षेत्रों में भारतीय प्रदाताओं के लिए अवसर खोले हैं, जबकि भारत ने भी समान संख्या में क्षेत्रों को आंशिक रूप से उदार बनाया है।
इसके अलावा समझौते के तहत भारतीय छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को भी सरल किया गया है। विशेषकर स्टेम क्षेत्रों में पोस्ट-स्टडी वर्क अवसर बढ़ाए गए हैं और आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं निर्माण जैसे क्षेत्रों में 5,000 वीजा की व्यवस्था की गई है।
यह एफटीए भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच न केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को भी नई दिशा देगा।













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