डेस्क : मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बाधित हो गई है। इस कारण चीन, भारत, पाकिस्तान सहित कई एशियाई देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन वैश्विक तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है, लेकिन मौजूदा हालात में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव देखा जा रहा है।
एशियाई देशों में इसका सीधा असर ऊर्जा जरूरतों पर पड़ रहा है। कई देशों में औद्योगिक उत्पादन, बिजली आपूर्ति और ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर इसका प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है।
पाकिस्तान की स्थिति विशेष रूप से कठिन बताई जा रही है, जहां ऊर्जा संकट पहले से ही बना हुआ था। होर्मुज मार्ग बाधित होने के बाद वहां एलएनजी आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और देश को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है।
चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है, इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडारों पर ध्यान दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर वैश्विक तेल और गैस कीमतों पर पड़ता है। मौजूदा स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी दर्ज की गई है और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।













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