डेस्क : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब आतंक के केंद्र “उचित दंड” से बच नहीं सकते। उन्होंने यह टिप्पणी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में की।
अपने संबोधन में सिंह ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए हाल ही में उसकी बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले, 22 अप्रैल को हमने पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। यह घटना केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि पूरी मानवता को झकझोर देने वाली थी।”
रक्षा मंत्री ने भारत की बदलती रणनीतिक सोच पर जोर देते हुए कहा कि देश अब सीमा पार से आने वाले आतंकवादी खतरों के प्रति अधिक निर्णायक और सख्त दृष्टिकोण अपना रहा है। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” इस नीति का स्पष्ट उदाहरण है, जिसके माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया कि आतंक के केंद्र अब जवाबदेही से नहीं बच सकते।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई थी। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। आतंकियों ने पर्यटक स्थल माने जाने वाले इस इलाके में घुसकर निर्दोष लोगों की हत्या की थी, जिससे क्षेत्र में भय और शोक का माहौल फैल गया।
इसके बाद 7 मई 2025 को भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ प्रमुख आतंकी लॉन्चपैड नष्ट किए गए तथा 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई।
इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा, जिसके दौरान ड्रोन हमलों और सीमा पार गोलाबारी की घटनाएं भी हुईं। जवाबी सैन्य कार्रवाई में भारत ने लाहौर और गुजरांवाला के पास रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
लगातार सैन्य दबाव और क्षति के बाद पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया और 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति बनी।
इसके अलावा, इस घटनाक्रम के बाद भारत ने गैर-सैन्य कदमों के तहत सिंधु जल संधि को स्थगित करने और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय व्यापार पर रोक लगाने जैसे निर्णय भी लिए।
वहीं सुरक्षा बलों ने एक और संयुक्त कार्रवाई “ऑपरेशन महादेव” के तहत पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को भी ढेर किया।
राजनाथ सिंह के इस बयान को भारत की आतंकवाद विरोधी नीति के सख्त और स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें यह संकेत दिया गया है कि अब किसी भी आतंकी गतिविधि को केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जाएगा।













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