डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच भारत सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए बड़े कदम उठाने की तैयारी में है। बढ़ते आयात बिल और डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक की चिंता बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के साथ स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक इसी तरह बने रहते हैं, तो गैर-जरूरी आयातों पर नियंत्रण, ईंधन खपत में कटौती और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिससे कई महीनों के आयात का भुगतान किया जा सकता है। हालांकि लगातार महंगा हो रहा कच्चा तेल देश के आयात खर्च को तेजी से बढ़ा सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
सरकार पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कक्षाओं और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने पर भी विचार कर रही है। ऊर्जा बचत को लेकर विभिन्न मंत्रालयों को दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया संकट और गहराता है तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है तथा विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में सरकार पहले से ही एहतियाती रणनीति अपनाने में जुटी हुई है।
उधर, भारतीय रिजर्व बैंक भी बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर रुपये को स्थिर रखने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।













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