नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार को भारतीय रिज़र्व बैंक से अब तक का सबसे बड़ा लाभांश मिलने की संभावना जताई जा रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई वित्त वर्ष 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को लगभग 3 लाख करोड़ रुपये तक का अधिशेष हस्तांतरित कर सकता है। इस पर अंतिम निर्णय आरबीआई की केंद्रीय बोर्ड बैठक में लिया जाएगा।
यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह अब तक का सबसे बड़ा लाभांश होगा। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में आरबीआई ने केंद्र सरकार को लगभग 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लाभांश दिया था।
सरकार के लिए राजकोषीय राहत का साधन
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संभावित राशि सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव के चलते आयात बिल पर दबाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे में यह अतिरिक्त राजस्व सरकार को बजटीय संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
आरबीआई के लाभांश का आधार
भारतीय रिज़र्व बैंक का लाभ मुख्य रूप से कई स्रोतों से आता है। इनमें विदेशी मुद्रा भंडार पर निवेश से प्राप्त आय, सरकारी प्रतिभूतियों पर ब्याज, सोने के भंडार से मिलने वाला लाभ तथा मुद्रा प्रबंधन से होने वाली आय शामिल है। हाल के वर्षों में वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि और परिसंपत्तियों के बेहतर प्रदर्शन के कारण आरबीआई की आय में बढ़ोतरी देखी गई है।
आर्थिक स्थिति पर संभावित प्रभाव
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह लाभांश सरकार को अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा। इससे विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और पूंजीगत व्यय के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि केवल केंद्रीय बैंक के लाभांश पर निर्भर रहना दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता का विकल्प नहीं हो सकता।
आरबीआई बोर्ड की आगामी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है, जिसके बाद सरकार को यह बड़ी वित्तीय राहत प्राप्त हो सकती है।













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