जिनेवा: विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने बुधवार को बताया कि 18 मई तक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में इबोला प्रकोप के कुल 528 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें 132 मौतें दर्ज की गई हैं।
संगठन के अनुसार अब तक 668 संपर्कों की पहचान की गई है, जिनमें 541 डीआर कांगो और 127 युगांडा में हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में असुरक्षा और आवाजाही प्रतिबंधों के कारण संपर्कों का पता लगाने और निगरानी कार्यों में कठिनाई आ रही है।
संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने पहले ही इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। यह प्रकोप इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा बताया गया है।
डब्ल्यूएचओ ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि युगांडा में रिपोर्ट किए गए 12 संदिग्ध मामलों में से दो प्रयोगशाला परीक्षण में पुष्टि किए गए हैं, जबकि शेष मामलों की रिपोर्ट नकारात्मक आई है।
प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, केस जांच और आपातकालीन प्रतिक्रिया गतिविधियों को तेज कर दिया गया है। डीआर कांगो में 38 विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है, जिनमें 20 स्वास्थ्य मंत्रालय के और 18 डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ शामिल हैं, जिन्हें किन्शासा से बुनिया भेजा गया है।
इसके अलावा 17 टन से अधिक आपातकालीन चिकित्सा सामग्री भेजी गई है, जिसमें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, दवाइयाँ, टेंट, स्ट्रेचर और अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं।
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि प्रयोगशाला क्षमता को भी मजबूत किया जा रहा है और मोबाइल लैब तथा विशेषज्ञ टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर जांच और निदान को बेहतर बनाया जा सके। साथ ही जोखिम संचार और सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ाया जा रहा है ताकि लोग प्रतिक्रिया प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल हो सकें।
इस बीच भारत (भारत) का स्वास्थ्य मंत्रालय भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा की है और एहतियाती कदम उठाए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत में अब तक इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है और वर्तमान में देश के लिए जोखिम न्यूनतम है। हालांकि, एहतियात के तौर पर प्रवेश बिंदुओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में निगरानी और तैयारी को और मजबूत किया जा रहा है।













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