डेस्क : संयुक्त राष्ट्र महासचिव की नई रिपोर्ट में युद्ध के दौरान यौन हिंसा के मामलों को लेकर एक गंभीर और विवादास्पद निष्कर्ष सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल और रूस को उन पक्षों की सूची में शामिल किया गया है, जिन पर सशस्त्र संघर्ष के दौरान बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा के पैटर्न में संलिप्त होने का “विश्वसनीय संदेह” है। यह सूची संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे का हिस्सा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इज़राइल और रूस को चेतावनी दी थी कि यदि यौन हिंसा से जुड़े दस्तावेज़ित मामले जारी रहते हैं, तो उन्हें इस सूची में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, नई रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के “पैटर्न और घटनाएं” लगातार दर्ज की जाती रहीं, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों देशों की ओर से जांचकर्ताओं को लगातार संबंधित क्षेत्रों और हिरासत केंद्रों तक पहुंच देने से इनकार किया गया, जिससे स्वतंत्र सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इज़राइल के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में इज़राइली हिरासत में रखे गए फिलिस्तीनियों तथा कब्ज़े वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में यौन हिंसा के पैटर्न लगातार दर्ज किए गए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जिन मामलों की पुष्टि की गई है, वे कई वर्षों से चले आ रहे रुझानों की ओर संकेत करते हैं, हालांकि हिरासत केंद्रों तक पहुंच न होने के कारण यह आंकड़े पूर्ण नहीं माने जा सकते।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन घटनाओं में कथित रूप से इज़राइली सेना, सुरक्षा बल और जेल सेवाओं से जुड़े कर्मी शामिल पाए गए हैं।
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए इज़राइल ने इसे “शर्मनाक और बेतुका” निर्णय बताया और कहा कि इससे इज़राइल और हमास को एक ही स्तर पर रखने की कोशिश की गई है, जो स्वीकार्य नहीं है।
रूस के संदर्भ में रिपोर्ट में यूक्रेन के कब्ज़े वाले क्षेत्रों और रूस के भीतर भी यौन हिंसा की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इनमें विशेष रूप से युद्धबंदियों के साथ की गई हिंसा शामिल है, जिन्होंने रिहाई के बाद अपने अनुभव साझा किए।
मानवाधिकार निगरानी मिशन के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में 310 मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें बलात्कार, जननांगों पर अत्याचार और बिजली के झटके देने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में अधिकांश पीड़ित पुरुष थे, विशेषकर युद्धबंदी।
संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध और इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहले से ही तनाव और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है।













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