नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को एक बार फिर भारत का यह स्पष्ट रुख दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग अनिवार्य है और जो देश सीमा पार आतंकवाद को समर्थन या बढ़ावा देते हैं, उन्हें चिन्हित कर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय राजधानी में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद आज भी एक गंभीर वैश्विक चुनौती बना हुआ है, जिसके खिलाफ सभी देशों को मिलकर कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने कहा, “सीमा पार आतंकवाद एक ऐसा खतरा है जिसके खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होकर लड़ना चाहिए। जो देश अपने क्षेत्र से आतंकवाद को समर्थन या बढ़ावा देते हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से उजागर किया जाना चाहिए।”
यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के हालिया मास्को दौरे के संदर्भ में आया है, जहां उन्होंने 1st इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम और सुरक्षा मामलों के उच्च स्तरीय अधिकारियों की XIV अंतरराष्ट्रीय बैठक को संबोधित किया था।
अपने संबोधन में डोभाल ने कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते और सभी देशों को आतंकवादी संगठनों के साथ-साथ उन्हें समर्थन देने वाले देशों के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। हर देश की जिम्मेदारी है कि वह इसके खिलाफ लड़ाई लड़े। इस लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए।”
डोभाल ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार रहा है। इस हमले में 26 नागरिकों की हत्या हुई थी, जिसे बाद में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी समूह “द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)” ने स्वीकार किया था।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी अपने बयान में स्पष्ट किया था कि ऐसे हमलों के दोषियों, योजनाकारों, वित्तपोषकों और समर्थकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। “इसी संदर्भ में भारत ने जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की,” उन्होंने कहा।
हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारतीय बलों ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े कई आतंकी लॉन्चपैड्स को नष्ट किया और इस अभियान में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया।
इसके बाद सीमा पार से ड्रोन हमले और गोलाबारी की घटनाएं भी हुईं, जिससे दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण सैन्य स्थिति बनी रही। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रडार सिस्टम और सैन्य ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया।
बाद में 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बातचीत के बाद संघर्षविराम पर सहमति बनी, जिससे सीमा पर अस्थायी रूप से तनाव में कमी आई।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत