डेस्क : मॉस्को में आयोजित प्रथम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच तथा सुरक्षा मामलों से जुड़े उच्च स्तरीय अधिकारियों की चौदहवीं बैठक को संबोधित करते हुए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से व्यापार की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
डोभाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। उन्होंने तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए व्यवधानों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने और तनाव कम करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है और भारत इस दिशा में रचनात्मक सहयोग देने के लिए तैयार है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए डोभाल ने कहा कि वर्तमान हालात अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नाजुकता को उजागर करते हैं, जहां समुद्री यातायात और ऊर्जा ढांचे पर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं।
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्षेत्रीय तनाव और भी गहरा होता दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव के चलते इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों के अनुसार, ईरान द्वारा कथित रूप से पारगमन शुल्क व्यवस्था लागू करने की चर्चा भी इस विवाद का हिस्सा रही है, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज हुई है।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने इस तरह की किसी भी व्यवस्था को स्वीकार न करने की चेतावनी दी है और कहा है कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अपने संबोधन में अजीत डोभाल ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 1945 की संरचनाओं पर आधारित वर्तमान वैश्विक संस्थाएं आज की सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी समाधान करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए इन्हें अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को दोहराते हुए कहा था कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे संघर्षों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुधार दोनों जरूरी हैं।
यह सुरक्षा मंच 26 से 29 मई तक मॉस्को में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 140 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, सुरक्षा परिषदों के सचिव, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।













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