पटना : बिहार की राजनीति में सरकारी आवास को लेकर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि सरकार बंगला खाली कराना चाहती है तो बल प्रयोग कर ले, लेकिन वह स्वयं यह आवास नहीं छोड़ेंगी।
विवाद की शुरुआत बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी उस अंतिम नोटिस से हुई है, जिसमें राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली करने का निर्देश दिया गया है। सरकार इस बंगले का आवंटन पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम के नाम कर चुकी है। नोटिस के बाद यह मामला प्रशासनिक दायरे से निकलकर सीधे राजनीतिक अखाड़े में पहुंच गया है।
दिल्ली से पटना लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में राबड़ी देवी ने सरकार के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में बंगला खाली नहीं करेंगी और यदि सरकार को इसे खाली कराना है तो पुलिस बल का इस्तेमाल करे। उनके इस बयान को विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव के रूप में देखा जा रहा है।
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार का यह आवास पिछले दो दशकों से राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्ष 2005 से परिवार इसी परिसर में रह रहा है। राजद की कई महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकों से लेकर पारिवारिक आयोजनों तक, 10 सर्कुलर रोड का यह बंगला पार्टी की राजनीति का एक प्रतीकात्मक केंद्र माना जाता रहा है।
दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष के नाते राबड़ी देवी को पहले ही 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है। ऐसे में पुराने आवास पर उनका दावा नियमों के अनुरूप नहीं है। सरकार का कहना है कि आवंटन रद्द होने के बाद बंगला खाली करना कानूनी और प्रशासनिक आवश्यकता है।
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई कर रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर नियम सभी के लिए समान हैं और किसी भी व्यक्ति को विशेष छूट नहीं दी जा सकती।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक सरकारी बंगले तक सीमित नहीं है। इसके पीछे सत्ता और विपक्ष के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी दिखाई दे रही है। ऐसे समय में जब बिहार में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं, यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है और क्या यह विवाद अदालत, प्रशासन और राजनीति के बीच एक बड़े टकराव का रूप लेता है।













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