जयपुर : निर्माण नगर स्थित महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के संबोधि सभागार में चल रही आध्यात्मिक प्रवचन माला के अंतर्गत शनिवार को “शांति और विकास” विषय पर प्रेरक चर्चा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने जीवन में संतुलन, शांति और उन्नति के लिए आत्मचिंतन का संदेश दिया।
मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ने अपने प्रवचन में कहा कि यदि व्यक्ति जीवन में वास्तविक शांति और विकास चाहता है तो पुरुषों को अहंकार की भावना तथा महिलाओं को हीनता की भावना से स्वयं को मुक्त करना होगा। उन्होंने कहा कि अहंकार पारस्परिक संबंधों में तनाव, टकराव और दूरी को जन्म देता है, जबकि हीन भावना व्यक्ति की प्रगति को भीतर से बाधित करती है। संतुलित और संस्कारित जीवन ही वास्तविक सफलता का आधार है।
प्रवचन सभा में मुनि श्री संभव कुमार जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बालक को “कोरा कागज” कहना पूर्ण सत्य नहीं है, क्योंकि प्रत्येक बालक अपने साथ पूर्व संस्कारों का भी प्रभाव लेकर आता है। उसमें अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के संस्कार विद्यमान होते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि परिवार और समाज उसके श्रेष्ठ संस्कारों को जाग्रत करें। उन्होंने अभिभावकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि माता-पिता स्वयं संस्कारित जीवन जिएँ, तभी संतान में भी संस्कार विकसित होंगे।
कार्यक्रम के दौरान प्रति चतुर्दशी को होने वाले हाजरी (मर्यादा पत्र) वाचन का क्रम भी संपन्न हुआ। मुनि श्री ने इस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि तेरापंथ धर्म संघ के संस्थापक आचार्य श्री भिक्षु स्वामी ने गण की एकता, अखंडता, पारस्परिक व्यवहार की शुद्धता, मधुरता तथा आचार-विचार की पवित्रता के लिए अनेक मर्यादाएँ निर्धारित की थीं। इन्हीं मर्यादाओं की जानकारी और स्मरण हेतु प्रत्येक चतुर्दशी को धर्म परिषद में उनका वाचन किया जाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर अर प्रभु की स्तुति से हुआ। मंगल, उत्तम और शरण सूत्रों के उच्चारण के साथ सभा का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा और कार्यक्रम का मधुर समापन हुआ।
प्रवचन के पश्चात मुनिद्वय के सान्निध्य में एक स्मृति सभा का आयोजन भी किया गया। श्रीडूंगरगढ़ निवासी एवं जयपुर प्रवासी नेत्रदानी स्वर्गीय श्री मोतीलाल जी पुगलिया के निधन पर आयोजित इस सभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर श्री पन्नालाल जी पुगलिया, तेरापंथ सभा अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी गोलछा, श्री दौलत जी डागा तथा तेरापंथ युवक परिषद के श्री वरुण जी बरड़िया ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
श्री अविनाश जी नाहर ने स्वर्गीय आत्मा का परिचय प्रस्तुत करते हुए सभा का कुशल संचालन किया तथा दिवंगत आत्मा की सेवाभावी जीवन यात्रा को स्मरण किया।













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