डेस्क : सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि भारत को उकसाया गया तो वह किस प्रकार सटीकता, संकल्प और सामरिक क्षमता के साथ जवाब दे सकता है। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त शक्ति को प्रदर्शित किया, बल्कि विरोधी देशों को भी स्पष्ट संदेश दिया है।
पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के खेत्रपाल परेड ग्राउंड में 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में खतरे हमेशा पारंपरिक युद्ध के रूप में सामने नहीं आते। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया है कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को दृढ़ता और सटीक रणनीति के साथ लागू किया जाता है, तब भारत किसी भी उकसावे का प्रभावी उत्तर देने में सक्षम है।
सेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—के बीच तालमेल और संयुक्त संचालन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता इसी एकीकृत सैन्य दृष्टिकोण का परिणाम थी, जिसकी बुनियाद एनडीए में तैयार होती है। उनके अनुसार आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप में संयुक्तता केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि सैन्य सफलता की अनिवार्य शर्त बन चुकी है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भविष्य के युद्ध तकनीक, सूचना, ड्रोन, साइबर क्षमता और बहु-आयामी सैन्य समन्वय पर आधारित होंगे। ऐसे में युवा अधिकारियों को पारंपरिक सैन्य कौशल के साथ नई चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा।
पासिंग आउट परेड में कुल 355 कैडेट भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल हुए। इनमें 12 मित्र देशों के 24 विदेशी कैडेट भी शामिल रहे। इस अवसर पर सेना प्रमुख ने अपने एनडीए के दिनों को याद करते हुए कहा कि चार दशक पहले वह स्वयं इसी अकादमी से पास आउट हुए थे और समीक्षा अधिकारी के रूप में यहां लौटना उनके लिए गर्व का क्षण है।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सेना प्रमुख की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय सैन्य नेतृत्व लगातार संयुक्त युद्धक क्षमता, तकनीकी आधुनिकीकरण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सैन्य तैयारी पर जोर दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान ने भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया क्षमता और सैन्य समन्वय को नए स्तर पर स्थापित किया है।













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