डेस्क: भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी पर 1982 में बांग्लादेश के साथ गंगा और तीस्ता नदी जल-बंटवारे को लेकर हुए समझौतों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इन समझौतों को देश के किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए “राष्ट्रीय हितों की अनदेखी” का आरोप लगाया है।
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि उस समय की कांग्रेस सरकार ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ ऐसे जल-साझेदारी समझौते किए, जिनका प्रतिकूल प्रभाव भारत के कई राज्यों, विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के किसानों पर पड़ा। उनके अनुसार इन फैसलों के कारण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ा तथा कृषि गतिविधियाँ प्रभावित हुईं।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि गंगा और तीस्ता जैसी प्रमुख नदियों के जल बंटवारे से देश के भीतर जल संसाधनों का संतुलन बिगड़ा और किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल नहीं मिल पा रहा है। निशिकांत दुबे ने इसे कांग्रेस की नीति बताते हुए कहा कि उस समय राष्ट्रीय हितों की अपेक्षा राजनीतिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई।
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल में एक बार फिर जल-बंटवारे और भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अपने-अपने रुख के साथ सामने आने लगे हैं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से इस आरोप पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।













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