नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस सांसद Abhishek Banerjee पर कथित हमले को लेकर राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल के बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सिब्बल ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे देश में रहने पर शर्म महसूस होती है, जहां सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टी लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल के सोनारपुर क्षेत्र में हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के काफिले पर कथित हमला हुआ था। आरोप है कि उनके ऊपर पत्थर, जूते और अंडे फेंके गए तथा धक्का-मुक्की भी की गई। घटना के बाद सिब्बल ने प्रेस वार्ता कर कहा कि यह हमला पूर्व नियोजित प्रतीत होता है और यदि अभिषेक बनर्जी ने हेलमेट नहीं पहना होता तो उन्हें गंभीर चोट लग सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा व्यवस्था जानबूझकर कमजोर की गई और हमलावरों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
सिब्बल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्षी नेताओं पर इस प्रकार के हमले बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने चुनाव आयोग, केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
वहीं भाजपा ने सिब्बल के बयान को देश और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान बताया। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि सिब्बल का बयान उनकी चयनात्मक राजनीति को दर्शाता है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में पूर्व में हुई राजनीतिक हिंसा पर सिब्बल कभी मुखर नहीं हुए, लेकिन अब भाजपा को निशाना बनाने के लिए देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर इस प्रकार की टिप्पणी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान है।
इस बीच अभिषेक बनर्जी ने भी हमले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। तृणमूल कांग्रेस ने घटना को भाजपा समर्थित हमला बताया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है तथा दोनों दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।













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