नई दिल्ली : भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) सोमवार से लागू हो गया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करेगा तथा सेवा, दवा और श्रम-प्रधान क्षेत्रों में नए अवसर खोलेगा।
गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत-ओमान संबंधों को नई गति देगा और ओमान को खाड़ी क्षेत्र, एशिया तथा अफ्रीका के व्यापक बाजारों तक पहुंच के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करेगा। उनके अनुसार, समझौते के लागू होने के साथ ही भारत को ओमान की 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिल गई है, जिससे भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को लाभ होगा। उन्होंने बताया कि समझौते के पहले ही दिन भारत के विभिन्न हिस्सों से 10 से अधिक खेपें रियायती शुल्क का लाभ लेते हुए ओमान के लिए रवाना हो चुकी हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मस्कट में जिस समझौते को दोनों देशों के साझा भविष्य का खाका बताया था, वह अब वास्तविक रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि ओमान केवल एक बाजार नहीं, बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों, पूर्वी अफ्रीका तथा हिंद महासागर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था तक पहुंच का महत्वपूर्ण केंद्र है। सोहार, दुक्म और सलालाह जैसे बंदरगाह इस दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।
गोयल ने कहा कि भारतीय वस्त्र, खेल परिधान, रत्न एवं आभूषण, दवा, चिकित्सा उपकरण, इंजीनियरिंग उत्पाद, खेल सामग्री, कृषि उत्पाद, मांस, चमड़ा, प्लास्टिक, ऑटोमोबाइल और समुद्री उत्पाद क्षेत्रों को ओमानी बाजार में प्रतिस्पर्धियों की तुलना में विशेष लाभ मिलेगा। वहीं भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों को भी ओमान से आने वाले उत्पादों का लाभ प्राप्त होगा।
समझौते के तहत ओमान ने दशकों पुराने बिना पॉलिश किए गए संगमरमर के निर्यात प्रतिबंध को हटाने पर सहमति व्यक्त की है। इससे राजस्थान और आंध्र प्रदेश के शिल्पकारों तथा उद्योगों को कच्चा माल सीधे ओमान से प्राप्त करने में सुविधा होगी।
व्यापार के अलावा यह समझौता सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रावधान करता है। इसके अंतर्गत भारतीय पेशेवरों, व्यवसायिक आगंतुकों, अनुबंधित सेवा प्रदाताओं तथा स्वतंत्र विशेषज्ञों को अस्थायी निवास और कार्य संबंधी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी भारतीय दवा उद्योग को बड़ी राहत मिली है। अब अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए), यूरोपीय औषधि एजेंसी (ईएमए) या ब्रिटेन की एमएचआरए से स्वीकृत भारतीय जेनेरिक दवाओं को ओमान में 90 दिनों के भीतर विपणन अनुमति मिल सकेगी। इससे ओमान के मरीजों को किफायती भारतीय दवाएं शीघ्र उपलब्ध होंगी।
गोयल ने बताया कि यह समझौता पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौतों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिनके माध्यम से 38 विकसित देशों के साथ व्यापारिक पहुंच सुनिश्चित हुई है। भारत ने अगले पांच वर्षों में दो ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है।
भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने ओमान से 7.2 अरब डॉलर के सामान का आयात किया, जिसमें कच्चा तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और उर्वरक प्रमुख रहे।
सरकार वर्तमान में इज़राइल, चिली, कनाडा और छह सदस्यीय जीसीसी समूह के साथ भी मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रही है। इसके अलावा रूस और मध्य एशिया को शामिल करने वाले यूरेशियन समूह के साथ भी वार्ता शुरू हो चुकी है, जबकि मेक्सिको और इक्वाडोर ने भी भारत के साथ व्यापार समझौतों में रुचि दिखाई है।













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