डेस्क : कर्नाटक की राजनीति में लंबे इंतजार के बाद सत्ता परिवर्तन की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक और केंद्रीय नेतृत्व के फैसले के बाद अब डी. के. शिवकुमार के राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं, जबकि मंत्रिमंडल गठन को लेकर पार्टी के भीतर गहन मंथन जारी है।
सूत्रों के अनुसार, बेंगलुरु में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। कांग्रेस हाईकमान और राज्य नेतृत्व के बीच मंत्रियों के चयन और विभागों के बंटवारे को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि शुरुआती चरण में लगभग 8 से 10 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है, जबकि बाकी मंत्रिमंडल का विस्तार बाद में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधना बताया जा रहा है।
इधर, मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर चले लंबे खींचतान के बाद आखिरकार डी. के. शिवकुमार के नाम पर सहमति बनी है। उन्हें संगठन और चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका के चलते पार्टी का मजबूत चेहरा माना जाता है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार में अहम भूमिका दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि, सरकार गठन से पहले ही मंत्रिमंडल और उपमुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई नेताओं की दावेदारी और गुटीय समीकरणों के कारण कांग्रेस नेतृत्व के सामने संतुलन साधने की चुनौती खड़ी हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नई सरकार न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि पार्टी के आंतरिक संतुलन के लिहाज से भी अहम साबित होगी। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब कांग्रेस के सामने विकास कार्यों को गति देने और चुनावी वादों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।













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