जयपुर : तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने कहा कि विनम्रता व्यक्ति के जीवन का सर्वोत्तम गुण है और वास्तविक महानता का आधार भी। उन्होंने कहा कि बड़ों को प्रणाम एवं नमस्कार करना छोटों की महानता है, जबकि छोटों का सम्मान करना बड़ों की उदारता का परिचायक है। विनम्रता और वत्सलता दोनों ही अपने-अपने स्थान पर अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
डॉक्टर्स कॉलोनी स्थित श्री मनीष मालू “गुरु कृपा” एवं श्री प्रमेश जैन के “नवकार” निवास पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन में जो उपलब्धियाँ विनम्रता से प्राप्त होती हैं, वे किसी भौतिक साधन से प्राप्त नहीं की जा सकतीं।
“विनम्रता विकास का पथ है” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विनम्रता व्यक्तित्व को निखारने वाला सर्वोत्तम गुण है। सभी सद्गुणों की शोभा विनम्रता से ही बढ़ती है। महानता का मार्ग विनम्रता से होकर जाता है और वास्तव में विनम्रता ही महानता का सच्चा लक्षण है।
मुनि श्री ने कहा कि संसार में विजय झुकने वालों की होती है, जबकि अहंकार करने वाले अंततः टूटते और हारते हैं। विनम्र व्यक्ति अपने व्यवहार से लोगों के हृदय में स्थान बना लेता है। वह कभी स्वयं अपनी प्रशंसा नहीं करता। जैसे हीरा कभी अपने मूल्य का स्वयं बखान नहीं करता, वैसे ही विनम्र व्यक्ति की प्रशंसा समाज स्वयं करता है।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार पुष्प में सुगंध होने पर भंवरा स्वतः उसकी ओर आकर्षित हो जाता है, उसी प्रकार विनम्रता में भी एक चुम्बकीय शक्ति होती है जो सहज ही दूसरों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि झुकने वाला घड़ा ही भरता है, अकड़ने वाला सदैव खाली रह जाता है।
उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर और भीष्म पितामह के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि युधिष्ठिर को विजय का आशीर्वाद उनकी विनम्रता के कारण ही प्राप्त हुआ था। इसी प्रकार भगवान महावीर के प्रथम गणधर गौतम स्वामी पर उनकी असीम कृपा बरसने का प्रमुख कारण भी उनकी विनम्रता ही थी।
धर्मसभा के प्रारंभ में तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान की स्तुति की गई। कार्यक्रम के दौरान एक दिवसीय प्रत्याख्यान एवं प्रेक्षाध्यान का आयोजन भी हुआ। मंगल मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
इससे पूर्व मुनि मंडल संत महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल से विहार कर जुलूस के साथ डॉक्टर्स कॉलोनी पहुँचा, जहाँ श्रद्धालुओं ने भावभीना स्वागत एवं अगवानी कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।













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