डेस्क :जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका और इज़राइल के रिश्तों को लेकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सार्वजनिक रूप से अधिक जिम्मेदारी से काम करने की सलाह देते हुए कहा कि अमेरिका के समर्थन के बिना इज़राइल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता था।
फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने वर्षों तक इज़राइल की सुरक्षा और अस्तित्व को मजबूत बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में उठाए गए कदमों ने इज़राइल को अभूतपूर्व राजनीतिक और सामरिक समर्थन प्रदान किया।
ट्रंप ने कहा कि उनका नेतन्याहू के साथ व्यक्तिगत संबंध अच्छा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इज़राइली नेतृत्व को अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी दिखाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से लेबनान में चल रही सैन्य गतिविधियों को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की और संकेत दिया कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव व्यापक शांति प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम एशिया लंबे समय से संघर्षों का केंद्र बना हुआ है और अब आवश्यकता तनाव बढ़ाने की नहीं बल्कि स्थायी समाधान खोजने की है। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार सैन्य कार्रवाई से आम नागरिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान के साथ समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों को आगे बढ़ाने में जुटा है, जबकि इज़राइल सुरक्षा संबंधी चिंताओं को लेकर अलग रुख अपनाए हुए है। ऐसे में दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
जी-7 सम्मेलन में ट्रंप के बयान को अमेरिका-इज़राइल संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर उन्होंने इज़राइल के प्रति अपने समर्थन को दोहराया, वहीं दूसरी ओर नेतन्याहू सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि क्षेत्रीय शांति और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देना समय की मांग है।













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