डेस्क : भारत के रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) क्षेत्र में वर्ष 2030 तक लगभग 11.6 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश आने की संभावना है। साथ ही, इनकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (AUM) दोगुने से अधिक बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच सकती हैं। यह अनुमान निवेश बैंकिंग कंपनी Avendus Capital की एक नई रिपोर्ट में व्यक्त किया गया है।
“ट्रस्ट द स्ट्रक्चर: REITs, InvITs एंड द रियल रिटर्न इम्पेरेटिव” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में तेज़ी से विस्तार के बावजूद भारत का सूचीबद्ध रियल एसेट्स बाजार अभी भी विकास के शुरुआती चरण में है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मात्र नौ वर्षों में भारत का REIT और InvIT बाजार लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों और करीब 5 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण तक पहुंच चुका है। हालांकि, आने वाले वर्षों में इसकी वृद्धि का दायरा इससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड, विदेशी निवेशक, खुदरा निवेशक और कॉरपोरेट ट्रेजरी जैसे विभिन्न निवेशकों से लगभग 11.6 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश इस परिसंपत्ति वर्ग को मिल सकता है।
अनुमान है कि मौजूदा रियल एस्टेट और अवसंरचना क्षेत्रों में विस्तार के बल पर REITs और InvITs की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इसके साथ ही यह क्षेत्र हर वर्ष 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्राथमिक बाजार अवसर भी सृजित कर सकता है।
वर्तमान में भारत के REIT और InvIT क्षेत्र की कुल AUM लगभग 10 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें REITs का योगदान करीब 2.97 लाख करोड़ रुपये और InvITs का योगदान लगभग 7.13 लाख करोड़ रुपये है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विकसित देशों की तुलना में भारत का बिजनेस ट्रस्ट बाजार अभी काफी कम विकसित है। भारत में REITs और InvITs का बाजार पूंजीकरण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 1.5 प्रतिशत है, जबकि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह अनुपात 5 से 12 प्रतिशत के बीच है।
रिपोर्ट ने क्षेत्र की वृद्धि के प्रमुख कारकों में भारत के तेज़ी से बढ़ते अवसंरचना निवेश, घरेलू बचतों के वित्तीयकरण, नियामकीय सुधारों और संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को शामिल किया है।
विशेष रूप से, भारत के दीर्घकालिक घरेलू संस्थागत निवेशकों ने REITs और InvITs में निवेश की उपलब्ध नियामकीय सीमा का केवल 7.5 प्रतिशत ही उपयोग किया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि इन सीमाओं का पूर्ण उपयोग किया जाए तो लगभग 7 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश इस क्षेत्र में प्रवाहित हो सकता है, जो वर्तमान मुक्त-प्रचलन बाजार पूंजीकरण का लगभग 2.6 गुना है।
रिपोर्ट में केंद्र सरकार की अवसंरचना विकास योजनाओं को भी InvITs के विस्तार का प्रमुख आधार बताया गया है। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) 2.0 के तहत वित्त वर्ष 2025 से 2028 के बीच लगभग 17 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की परिकल्पना की गई है, जिसके लिए दीर्घकालिक पूंजी की बड़ी आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अवसंरचना आवश्यकताएं इतनी व्यापक हैं कि केवल सरकारी बजट के माध्यम से उनका वित्तपोषण संभव नहीं है। ऐसे में पूंजी के पुनर्चक्रण और प्रभावी आवंटन में InvITs की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
भविष्य के अनुमान में कहा गया है कि वाणिज्यिक कार्यालय REITs की AUM वर्ष 2026 के लगभग 2.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2030 तक 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं सड़क क्षेत्र से जुड़े InvITs की परिसंपत्तियां इसी अवधि में 3.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत अभी एक गहरे और संस्थागत सूचीबद्ध रियल एसेट्स बाजार के निर्माण के शुरुआती चरण में है। जैसे-जैसे यह पारिस्थितिकी तंत्र परिपक्व होगा, निवेश पोर्टफोलियो में REITs और InvITs की रणनीतिक भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।













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