डेस्क : मिजोरम की एक अदालत ने नौ वर्ष पुराने गैंगरेप और एसिड अटैक मामले में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दो जवानों को दोषी ठहराते हुए 42-42 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है।
यह मामला जुलाई 2017 का है। ममित जिले के भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे क्षेत्र में रहने वाली एक आदिवासी महिला अपनी सहेली के साथ जंगल में वन उपज एकत्र करने गई थी। आरोप है कि उसी दौरान बीएसएफ के दो जवानों ने महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और बाद में उसकी पहचान छिपाने तथा उसे गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया। हमले में पीड़िता की आंखों और चेहरे को गंभीर नुकसान पहुंचा।
घटना के बाद पीड़िता की सहेली लापता हो गई थी, जिसका शव 11 दिन बाद जंगल से बरामद किया गया। हालांकि जांच के दौरान हत्या के पहलू की भी जांच की गई, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने डीएनए रिपोर्ट, चिकित्सीय साक्ष्य, पहचान परेड और अन्य दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म, एसिड हमला और गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचाने का दोषी पाया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने गैंगरेप के अपराध में 20 वर्ष, एसिड अटैक के लिए 12 वर्ष तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस प्रकार प्रत्येक दोषी को कुल 42 वर्ष का कारावास भुगतना होगा।
यह मामला राज्य में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा था। महिला अधिकार संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।













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