डेस्क : भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र तेजी से डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रहा है। ‘अपना एमएसएमई हायरिंग पल्स 2026’ रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से जुड़े कौशलों की मांग में 164 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जैसे-जैसे एमएसएमई अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं और डिजिटल उपकरणों को अपना रहे हैं, वैसे-वैसे उनकी भर्ती की प्रवृत्ति भी बदल रही है। नए व्यवसायों के भर्ती प्रणाली में जुड़ने और मौजूदा कंपनियों के विस्तार के चलते समग्र स्तर पर रोजगार सृजन में व्यापक वृद्धि देखी गई है।
हालांकि अभी भी एमएसएमई से जुड़ी लगभग 68 प्रतिशत नौकरी मांग टियर-1 शहरों में केंद्रित है, लेकिन कार्यबल अब महानगरों से बाहर भी तेजी से फैल रहा है। वित्त वर्ष 2026 में टियर-2 शहरों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो गैर-महानगरीय क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
रिपोर्ट के अनुसार टियर-3 शहर भी एक बड़े अवसर के रूप में उभर रहे हैं। ये क्षेत्र लगभग 20 प्रतिशत सक्रिय उपयोगकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन केवल 5 प्रतिशत नौकरी आवेदनों में बदल पाते हैं, जो औपचारिक रोजगार में उनकी संभावनाओं के कम उपयोग को दर्शाता है।
इसके साथ ही सूरत, राजकोट, नागपुर और रायपुर जैसे शहर नए हायरिंग हब के रूप में उभर रहे हैं, जबकि अहमदाबाद, पुणे, चेन्नई और दिल्ली जैसे स्थापित केंद्र पहले की तरह मजबूत बने हुए हैं।
कौशल आधारित मांग में भी बदलाव देखा गया है। बिक्री एवं व्यवसाय विकास से जुड़े कौशल अब कुल मांग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो पिछले वित्त वर्ष के 36 प्रतिशत से अधिक है। यह एमएसएमई क्षेत्र में ग्राहक-संपर्क और व्यवसाय विस्तार से जुड़े कार्यों की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टेलीसेल्स, अकाउंटिंग एवं टैक्सेशन, फील्ड सेल्स और कस्टमर सपोर्ट जैसी भूमिकाओं की मांग सबसे अधिक बनी हुई है, जो यह दिखाता है कि विस्तार करते व्यवसायों को अभी भी फ्रंटलाइन और ऑपरेशनल टैलेंट की आवश्यकता सबसे अधिक है।













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