डेस्क : भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाले दो महत्वपूर्ण समझौते—समग्र आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) और दोहरा अंशदान समझौता (डीसीसी)—15 जुलाई 2026 से लागू हो जाएंगे। इन समझौतों के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच निवेश, नवाचार और समग्र आर्थिक विकास को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में ब्रिटेन के व्यापार मंत्री और लेबर पार्टी के सांसद पीटर काइल के साथ हुई अपनी बैठक की जानकारी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने कहा कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को और गहरा करने के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पीयूष गोयल ने कहा, “हम अपने मित्र और समकक्ष श्री पीटर काइल के साथ लंदन में सार्थक चर्चा कर रहे हैं, जिसमें भारत–ब्रिटेन आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के नए अवसरों की तलाश की गई।”
सीईटीए का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, वस्तुओं और सेवाओं में बाजार पहुंच को आसान बनाना तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। वहीं, डीसीसी का मकसद दोनों देशों के बीच काम करने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को एक समय में केवल एक ही देश में सामाजिक सुरक्षा अंशदान की अनिवार्यता से राहत देना है।
इस व्यवस्था के तहत अस्थायी रूप से विदेश में कार्यरत कर्मचारियों को अपने गृह देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान जारी रखने की सुविधा मिलेगी, जिससे उनके सामाजिक सुरक्षा रिकॉर्ड और लाभों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता ‘सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट’ के ढांचे में आता है, जो दो देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा योगदान के समन्वय को सुनिश्चित करता है। इसके लागू होने के बाद ‘दोहरा योगदान’ समाप्त हो जाएगा और अस्थायी रूप से विदेश भेजे जाने वाले कर्मचारियों के लिए छूट अवधि 52 सप्ताह से बढ़ाकर 60 महीने तक की जा सकेगी।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत