डेस्क : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि राजनीतिक आलोचना का सही मंच संसद और विधानसभाएं हैं, जहां जनप्रतिनिधियों को खुलकर अपनी बात रखने और सरकार की नीतियों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायी सदनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और राजनीतिक असहमति या आलोचना को वहीं उठाया जाना चाहिए, न कि उस मंच से बाहर जाकर। उनके अनुसार, विधानसभा और संसद ही वे संस्थागत स्थान हैं जहां सरकार से जवाबदेही तय की जाती है और नीतियों पर विस्तृत बहस संभव होती है।
वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक दलों के बीच विभिन्न मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाज़ी का दौर जारी है। उन्होंने संकेत दिया कि लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि चर्चा का केंद्र औपचारिक विधायी प्रक्रियाओं के भीतर ही रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीतारमण की यह टिप्पणी संसदीय प्रणाली की भूमिका को रेखांकित करती है और यह संदेश देती है कि वास्तविक जवाबदेही और बहस का स्थान विधानसभाएं ही हैं।













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