नई दिल्ली: ई20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसके आलोचकों को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन को ई20 पेट्रोल के कारण कोई नुकसान हुआ है तो ऐसी एक भी कार का नाम सामने लाया जाए।
नई दिल्ली में आयोजित विकसित भारत कॉन्क्लेव में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि किसी कार में इस ईंधन के कारण तकनीकी खराबी आई हो। उन्होंने कहा कि ई20 के खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है और इसके प्रभाव को लेकर गलत जानकारी दी जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत लंबे समय से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है। पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने का उद्देश्य देश की तेल आयात निर्भरता को कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा कि एथनॉल उत्पादन से किसानों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।
माइलेज को लेकर उठे सवालों पर जवाब
ई20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज में कमी और पुराने वाहनों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि एथनॉल मिश्रित ईंधन से ईंधन दक्षता में अंतर महसूस हो सकता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि नए वाहन ई20 मानकों के अनुरूप तैयार किए गए हैं और इनमें इस ईंधन से कोई बड़ी समस्या नहीं आ रही है। वाहन कंपनियों ने भी नए मॉडलों को ई20 अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया है।
पुराने वाहनों को लेकर बनी हुई है चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, जो पुराने वाहन कम एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए थे, उनमें लंबे समय तक ई20 के इस्तेमाल को लेकर कुछ सावधानियां जरूरी हो सकती हैं। खासकर ईंधन प्रणाली से जुड़े कुछ हिस्सों पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चा होती रही है।
सरकार लगातार ई20 पेट्रोल को हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है। वहीं, वाहन मालिकों की मांग है कि ईंधन के प्रभाव और वाहनों की अनुकूलता को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।













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