मुंबई: आमतौर पर माना जाता है कि एल नीनो (El Niño) की स्थिति भारत के मानसून को कमजोर कर सकती है, लेकिन इस बार देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इसके विपरीत भारी बारिश देखने को मिल रही है। लगातार हो रही तेज बारिश ने लोगों को हैरान कर दिया है कि आखिर एल नीनो के प्रभाव के बावजूद मानसून इतना सक्रिय कैसे है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एल नीनो केवल एक कारक है जो मानसून को प्रभावित करता है। भारतीय मानसून एक जटिल मौसम प्रणाली है, जिसमें समुद्री तापमान, हवाओं की दिशा, वायुमंडलीय दबाव, नमी और स्थानीय परिस्थितियां अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए एल नीनो होने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
अरब सागर से आ रही नमी बनी मुख्य वजह
मुंबई में भारी बारिश का सबसे बड़ा कारण अरब सागर से आने वाली नमी से भरी हवाएं हैं। जब ये नम हवाएं पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से टकराती हैं तो तेजी से ऊपर उठती हैं और ठंडी होकर घने बादलों में बदल जाती हैं। यही प्रक्रिया मुंबई और आसपास के इलाकों में तेज बारिश का कारण बनती है।
मानसून की सक्रिय प्रणालियों ने बढ़ाई बारिश
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय वातावरण में कई ऐसी परिस्थितियां बनी हैं, जिन्होंने मानसून को सक्रिय बनाए रखा है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से मिलने वाली नमी, कम दबाव वाले क्षेत्र और मानसूनी हवाओं की मजबूत स्थिति ने बारिश की तीव्रता बढ़ाई है।
जलवायु परिवर्तन भी बदल रहा बारिश का तरीका
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। अब कई जगहों पर लंबे समय तक हल्की बारिश के बजाय कम समय में अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। गर्म वातावरण ज्यादा नमी को अपने अंदर रोक सकता है, जिससे बादल बनने पर अचानक भारी बारिश हो सकती है।
मुंबई में जलभराव की समस्या क्यों बढ़ती है?
मुंबई की भौगोलिक स्थिति भी भारी बारिश के प्रभाव को बढ़ा देती है। समुद्र के किनारे बसे इस शहर में जब तेज बारिश के साथ हाई टाइड की स्थिति बनती है तो पानी की निकासी प्रभावित हो जाती है। इसके अलावा बढ़ता शहरीकरण, कम होती प्राकृतिक जल निकासी और सीमित ड्रेनेज व्यवस्था भी जलभराव की समस्या को गंभीर बनाती है।
एल नीनो का मतलब हमेशा कम बारिश नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो का प्रभाव पूरे भारत में एक जैसा नहीं होता। यह मानसून की गति और वितरण को प्रभावित करता है, लेकिन स्थानीय मौसम परिस्थितियां कई बार इसके प्रभाव को कमजोर कर देती हैं। यही वजह है कि कुछ क्षेत्रों में कम बारिश हो सकती है, जबकि मुंबई जैसे इलाकों में अत्यधिक बारिश देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष: मुंबई की इस भारी बारिश के पीछे केवल एल नीनो या ला नीना जैसे वैश्विक मौसम कारक जिम्मेदार नहीं हैं। अरब सागर की नमी, पश्चिमी घाट की भौगोलिक स्थिति, सक्रिय मानसूनी हवाएं और बदलता जलवायु पैटर्न मिलकर इस तरह की तेज बारिश को जन्म देते हैं।













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