नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मंगलवार को देश के युवाओं की ऊर्जा और भागीदारी का उपयोग करते हुए टीबी मुक्त भारत अभियान को एक व्यापक जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के साथ आयोजित उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में नड्डा ने स्वयंसेवकों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और रक्षा बलों को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल की प्रगति समीक्षा बैठक में युवाओं और विभिन्न संस्थानों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया है।
‘माय भारत’ स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों को जोड़ने पर जोर
नड्डा ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में टीबी जांच शिविर आयोजित करने तथा जागरूकता अभियान को तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी से टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिल सकती है।
मेडिकल छात्रों की भागीदारी से मजबूत होगा अभियान
बैठक में मनसुख मांडविया ने देश के मेडिकल कॉलेजों को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि देश में करीब छह लाख स्नातक और दो लाख स्नातकोत्तर मेडिकल छात्र इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्र जागरूकता, स्क्रीनिंग और सामुदायिक स्तर पर टीबी नियंत्रण के प्रयासों में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
सरकार और समाज की साझेदारी से खत्म होगी टीबी
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। सरकार अब युवाओं, शिक्षण संस्थानों और विभिन्न संगठनों की भागीदारी बढ़ाकर टीबी मुक्त भारत अभियान को और गति देने की तैयारी कर रही है।













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