नई दिल्ली : देश में आईवीएफ (IVF) क्लीनिकों की बढ़ती संख्या और प्रजनन उपचार से जुड़े मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति आईवीएफ क्लीनिकों की कार्यप्रणाली, महिलाओं की सुरक्षा और उपचार प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी।
विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य आईवीएफ सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। समिति क्लीनिकों में अपनाई जा रही चिकित्सा प्रक्रियाओं, मरीजों को दी जाने वाली जानकारी, इलाज के दौरान सुरक्षा मानकों और संभावित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेगी।
आईवीएफ और सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) के क्षेत्र में देश में तेजी से विस्तार हुआ है। इसके साथ ही इलाज की गुणवत्ता, क्लीनिकों की निगरानी और मरीजों के हितों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठते रहे हैं।
महिला आयोग की ओर से गठित यह पैनल आईवीएफ क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की राय लेगा और बेहतर नियमन के लिए सुझाव तैयार करेगा। इसमें क्लीनिकों के संचालन, पंजीकरण व्यवस्था, मरीजों के अधिकार और उपचार प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईवीएफ सेवाओं की निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था बनने से महिलाओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही, इलाज से जुड़ी संभावित गलत प्रथाओं और अनियमितताओं पर भी रोक लगाई जा सकेगी।













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