डेस्क : अगर आपने जून महीने में इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल कर दिया है, लेकिन अभी तक रिफंड आपके बैंक खाते में नहीं पहुंचा है, तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। कई करदाताओं को रिटर्न प्रोसेसिंग में देरी के कारण रिफंड का इंतजार करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसका ई-वेरिफिकेशन पूरा होना भी जरूरी है। यदि करदाता ने रिटर्न भरने के बाद उसका सत्यापन नहीं किया है, तो विभाग की ओर से प्रोसेसिंग शुरू नहीं हो पाती और रिफंड में देरी हो सकती है।
इन कारणों से अटक सकता है रिफंड
आईटीआर का वेरिफिकेशन अधूरा होना
कई बार लोग इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करना भूल जाते हैं। बिना सत्यापन के रिटर्न लंबित रह सकता है।
एआईएस और फॉर्म 26एएस में अंतर
अगर रिटर्न में बताई गई आय, टीडीएस या अन्य टैक्स संबंधी जानकारी विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है, तो रिटर्न की जांच में समय लग सकता है और रिफंड प्रक्रिया रुक सकती है।
बैंक खाते की जानकारी में गलती
रिफंड प्राप्त करने के लिए बैंक खाता सही होना और उसका प्री-वैलिडेट होना जरूरी है। बैंक डिटेल में किसी भी तरह की गलती होने पर रिफंड खाते में पहुंचने में देरी हो सकती है।
गलत जानकारी या गलत आईटीआर फॉर्म का चयन
यदि करदाता ने गलत आईटीआर फॉर्म चुना है या आय से जुड़ी कोई जरूरी जानकारी नहीं दी है, तो रिटर्न प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है।
31 जुलाई तक दाखिल कर सकते हैं आईटीआर
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जिन व्यक्तिगत करदाताओं को टैक्स ऑडिट की आवश्यकता नहीं है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 निर्धारित है। करदाताओं को सलाह दी गई है कि वे समय पर अपना रिटर्न दाखिल करें और सभी जानकारियां सही तरीके से भरें।
ऐसे चेक करें रिफंड का स्टेटस
करदाता इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन कर अपने आईटीआर और रिफंड की स्थिति जांच सकते हैं। यदि स्टेटस “प्रोसेसिंग” दिखा रहा है, तो विभाग द्वारा प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना होगा। वहीं, किसी भी आपत्ति या सूचना के लिए रजिस्टर्ड ई-मेल और पोर्टल पर आए संदेशों को जरूर देखें।













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