नई दिल्ली : देश में स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि हाइड्रोजन ईंधन भविष्य के परिवहन की अहम जरूरत बन सकता है। इसी दिशा में देश के 10 प्रमुख मार्गों पर हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों का परीक्षण शुरू किया गया है।
नितिन गडकरी ने कहा कि भारत पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार नए विकल्पों पर काम कर रहा है। हाइड्रोजन ईंधन को प्रदूषण कम करने वाले और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
10 मार्गों पर हो रहा हाइड्रोजन वाहनों का ट्रायल
सरकार ने हाइड्रोजन से चलने वाली बसों और भारी वाहनों की क्षमता जांचने के लिए देश के 10 प्रमुख रूटों को चुना है। इन परीक्षणों के जरिए यह देखा जाएगा कि भारतीय परिस्थितियों में हाइड्रोजन ईंधन कितना प्रभावी और व्यावहारिक साबित हो सकता है।
इन पायलट प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य हाइड्रोजन वाहनों की तकनीक, संचालन क्षमता, ईंधन की उपलब्धता और लंबी दूरी के परिवहन में इसकी उपयोगिता का आकलन करना है।
प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर
केंद्र सरकार का लक्ष्य परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। हाइड्रोजन आधारित वाहन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके साथ ही देश की पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता भी कम करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहन, जैव ईंधन और अन्य हरित ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा दे रही है। हाइड्रोजन तकनीक को इसी अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
भविष्य में बढ़ सकता है इस्तेमाल
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर हाइड्रोजन वाहनों का परीक्षण सफल रहता है तो आने वाले समय में बसों, ट्रकों और अन्य भारी वाहनों में इसका इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है। इससे परिवहन क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है।
नितिन गडकरी ने कहा कि भारत वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन ऊर्जा देश के परिवहन तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत