भोपाल:विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस पार्टी आंतरिक कलह में फंसती दिख रही है। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स में कमलनाथ को सीएम फेस के तौर पर प्रॉजेक्ट किया जा रहा है और कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस चीफ को भावी मुख्यमंत्री बताते हुए होर्डिंग्स लगा दिए हैं, पार्टी के कुछ नेताओं ने कह दिया है कि मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव बाद तय होगा।
पार्टी के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस की परंपरा रही है कि पार्टी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करती। अजय सिंह से पहले पार्टी के प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव भी कुछ इसी प्रकार का बयान दे चुके हैं। इस बीच कमलनाथ ने भी सोमवार को कहा कि उन्हें बहुत कुछ हासिल हो चुका है और अब वह किसी पद की तलाश में नहीं हैं।
अजय सिंह ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि कांग्रेस की परंपरा रही है कि पार्टी में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं होता। केंद्रीय नेतृत्व और विधायक दल ही मुख्यमंत्री चुनता है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई व्यक्ति ऐसा कहता भी नहीं है कि वह भावी मुख्यमंत्री है। स्वयं को सिर्फ भावी विधायक ही बताया जा सकता है। इसके पहले अरुण यादव ने भी कहा था कि पार्टी में मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं घोषित किया जाता। विधायक दल की बैठक और उसके बाद केंद्रीय नेतृत्व के परामर्श के बाद ही मुख्यमंत्री घोषित किया जाता है।
प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव के पूर्व राजधानी भोपाल में कई स्थानों पर ऐसे होर्डिंग लगे हैं, जिनमें कमलनाथ को भावी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रदर्शित किया गया है। इन होर्डिंग्स को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी राजनीति तेज हो गई है। 2018 में कांग्रेस की जीत के बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, ज्योतिरादित्य सिंधिया कैंप की बगावत के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान की वापसी हुई।













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