मुंबई:इंडियन बार एसोसिएशन ने बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ “झूठे, निंदनीय और अवमाननापूर्ण आरोप” लगाने के लिए शिवसेना सांसद संजय राउत और अन्य के खिलाफ अवमानना याचिका-सह-जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है।
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका के पीछे मुख्य कारण के रूप में वकीलों के संघ ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और पूरी न्यायपालिका के खिलाफ राउत के आरोपों का हवाला दिया।
बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र भाजपा नेता किरीट सोमैया को गिरफ्तारी से ‘राहत’ देते हुए अंतरिम संरक्षण देने का आदेश दिया था। सोमैया युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को बचाने के लिए एकत्र किए गए धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित एक धोखाधड़ी मामले में आरोपी हैं। अदालत के इस फैसले को शिवसेना नेता संजय राउत ने बुधवार को कथिततौर पर “राहत घोटाला” करार दिया।
राउत ने सवाल किया कि कैसे केवल एक ही पार्टी के लोग अदालतों द्वारा दी जाने वाली “राहत” का लाभ उठा रहे हैं। शिवसेना नेता ने कहा, “सेव विक्रांत एक घोटाला है। करोड़ों-करोड़ों रुपये एकत्र और गबन किए गए। अदालत से राहत का मतलब यह नहीं है कि कोई भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त हो गया है।”
उन्होंने कहा, “राहत घोटाला न्यायिक व्यवस्था पर एक हालिया दाग है। राहत घोटाला अल-कायदा और (26/11 के आतंकवादी अजमल) कसाब से भी गंभीर है। केवल एक पार्टी के लोग ही इस घोटाले के लाभार्थी कैसे हो सकते हैं? यह सवाल है। विक्रांत फंड के हेराफेरी का मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। दोषियों को दंडित किया जाएगा। रुको और देखो।”
दायर याचिका में कहा गया, “संजय राउत के अनुसार, अदालतों ने एक तरफ भाजपा से जुड़े लोगों को राहत दी, लेकिन शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) आदि के आरोपियों को राहत नहीं दी। उनका संकेत जेल में बंद मंत्रियों नवाब मलिक और अनिल देशमुख को अदालतों द्वारा कोई राहत नहीं देने की ओर था।” अवमानना याचिका में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल और सामना की संपादक रश्मि ठाकरे को भी प्रतिवादी बनाया गया है।













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