महादेव को समर्पित सावन मास में इस बार अधिकमास लग रहा है। 19 वर्षों बाद ऐसा संयोग हो रहा है, जब सावन माह में अधिकमास लग रहा हो। ऐसे में यह सावन लगभग 59 दिनों का होगा। पंचांग के अनुसार श्रावन मास की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से हो रही है। 31 अगस्त 2023 को समाप्त होगा। शिव भक्तों को महादेव की उपासना के लिए दो माह का सावन मिलेगा। चार जुलाई से 31 अगस्त तक सावन रहेगा। मंगलवार से शुरू हो रहे सावन की पूर्णाहूति गुरुवार को होगी। इस दौरान कुल आठ सोमवारी पड़ रहे हैं। देवघर में भी श्रावणी मेला 31 अगस्त तक चलेगा।
इस सावन बरसेगी हरि और हर की कृपा
खड़ेश्वरी मंदिर के पुजारी राकेश पांडेय बताते हैं कि सावन मास महादेव को समर्पित है, लेकिन अधिकमास के स्वामी श्री विष्णु हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस बार सावन में पड़ने के कारण यह अधिकमास और भी विशेष हो गया है, क्योंकि इस मास में जो भी जातक निष्ठापूर्वक भगवान का चिंतन-मनन करेगा, उन्हें हरि और हर दोनों की कृपा प्राप्त होगी। राकेश पांडेय ने बताया कि पिछली बार वर्ष 2020 में अश्विन मास में अधिकमास पड़ा था।
क्या है वैदिक गणित
वेदाचार्य पंडित रमेशचंद्र त्रिपाठी कहते हैं कि पंचांग की गणना सौर और चंद्र से होती है। सौर मास 365 दिन का होता है और चंद्रमास 354 दिनों का। 11 दिन का अंतर प्रत्येक तीन वर्ष में 33 दिन का हो जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। इस बार अधिकमास श्रावण मास में लग रहा हैं।
मलमास को लेकर लोगों में है भ्रांतियां
रमेशचंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि कई लोग इसे मलमास कहते हैं और इसको लेकर जलार्पण व पूजा पाठ न करने की भ्रांतिया भी हैं जबकि वेदों में स्पष्ट है कि जैसे 27 नक्षत्र में अभिजीत नक्षत्र भगवान को अतिप्रिय है, ठीक उसी प्रकार अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास हरि और हर दोनों को प्रिय है। इसमें किया गया पूजा पाठ का अक्षय फल प्राप्त होता है।













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