डेस्क : देश में आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव आने वाले समय में बढ़ सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.1 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह करीब 2 प्रतिशत के स्तर पर रही थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और कुछ आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में संभावित वृद्धि के कारण महंगाई दर में यह बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्रिसिल ने अपने विश्लेषण में यह भी संकेत दिया है कि कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां महंगाई को ऊपर ले जाने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं। इसके अलावा खाद्य पदार्थों की कीमतों में बदलाव और घरेलू मांग की स्थिति भी महंगाई पर असर डाल सकती है।
महंगाई के बढ़ने की स्थिति में इसका सीधा प्रभाव आम लोगों की खरीद क्षमता और उपभोग पैटर्न पर पड़ सकता है। वहीं, अर्थव्यवस्था की विकास दर पर भी कुछ दबाव बनने की आशंका जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महंगाई के रुझान को देखते हुए अब सभी की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर टिकी रहेंगी। यदि कीमतों में तेजी बनी रहती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख अपना सकता है।













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